सूरह अल-इस्रा (9-15) की आयतें बताती हैं कि यह कुरआन उस मार्ग की ओर मार्गदर्शन करता है जो सबसे सीधा है। यह भले काम करने वाले मोमिनों को बड़े इनाम की खुशखबरी देता है और जो लोग आखिरत पर ईमान नहीं रखते, उन्हें दर्दनाक अज़ाब की चेतावनी देता है। आयतें ईश्वरीय न्याय और व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर भी जोर देती हैं: हर व्यक्ति अपने कर्मों के लिए खुद जिम्मेदार है, कोई किसी दूसरे का बोझ नहीं उठाएगा, और अल्लाह तब तक किसी को सजा नहीं देता जब तक कि वह कोई रसूल न भेज दे।