ये आयतें छह दिनों में आसमानों और ज़मीन को पैदा करने और कायनात का प्रबंध करने में अल्लाह की मुकम्मل कुदरत को बेनकाब करती हैं। ये स्रष्टा की कामिल हिकमत को दिखाती हैं जिसने सूरज को चमक और चांद को रोशनी बनाया ताकि वक्त का हिसाब लगाया जा सके। रात और दिन का बदलना परहेज़गारों के लिए उसकी बड़ाई की साफ़ निशानी है। इस ईश्वरीय कुदरत पर ईमान ही तमाम पैगंबरों के पैगाम का केंद्र है। ये आयतें ईमान वालों को उनके ईमान के बदले नेमतों वाले बागों की रहनुमाई का वादा करती हैं। आखिर में, ये दुनिया के रब की हमेशा तारीफ के साथ खत्म होती हैं।