Maktaba ya Kuonekana

यह आयतें (सूरह अल-हिज्र 25-50) इंसानों की गारे (मिट्टी) से और जिन्नात की आग से रचना के मूल को दर्शाती हैं। इसमें इब्लीस (शैतान) के घमंड के कारण आदम को सजदा करने से इनकार करने और उसे दुत्कारे जाने का वाकया है। शैतान ने इंसानों को भटकाने की कसम खाई, लेकिन अल्लाह ने स्पष्ट कर दिया कि सच्चे बंदों पर उसका कोई ज़ोर नहीं चलेगा। अंत में, शैतान के पीछे चलने वालों के लिए नरक के ठिकाने और अल्लाह से डरने वाले परहेज़गारों के लिए स्वर्ग (जन्नत) के बागों और चश्मों का वर्णन है, जहाँ वे बिना किसी द्वेष के शांति से रहेंगे।